नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। 15 अक्तूबर से चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट (पीटूएम) यूपीआई लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लगेगा। पीटूपी लेनदेन पहले की तरह मुफ्त ही बना रहेगा। एमडीआर केवल कारोबारियों के लिए देय होगा। यह बदलाव डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में एक नया अध्याय शुरू करेगा।
विशिष्ट व्यापारी श्रेणियों के लिए एक निश्चित व्यापारी छूट दर (एमडीआर) लागू की गई है। इसमें रेलवे, दूरसंचार सेवाएं, बीमा और ईंधन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं। यह दर 2000 रुपये से अधिक के प्रत्येक लेनदेन पर 5 रुपये निर्धारित की गई है।
इन विशिष्ट क्षेत्रों पर 0.4 फीसदी की परिवर्तनीय दर के बजाय एक निश्चित शुल्क लिया जाता है। यह शुल्क लेनदेन की कुल राशि पर निर्भर नहीं करता है, बल्कि प्रति लेनदेन केवल 5 रुपये तय है। यह निश्चित दर मॉडल महत्वपूर्ण सार्वजनिक सेवाओं में संभावित लागत वृद्धि को रोकने में सहायक है। उपयोगिता बिल संग्रह और ईंधन खुदरा जैसे कम लाभ वाले क्षेत्रों में भी यह व्यवस्था लागू है।
इसका मुख्य उद्देश्य आवश्यक उपभोक्ता सेवाओं को कम लागत वाला बनाए रखना है। साथ ही, यह सुनिश्चित करता है कि ये सेवाएं डिजिटल रूप से कुशल बनी रहें। यह नीति इन क्षेत्रों में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इससे उपभोक्ताओं पर किसी भी प्रकार का अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ता है।
रेलवे टिकट की खरीद पर भी यह निश्चित शुल्क लागू होता है। यदि टिकट का मूल्य 2000 रुपये से अधिक है, तो प्रति लेनदेन 5 रुपये का निश्चित शुल्क लगेगा। यह यात्रियों के लिए एक निश्चित लागत सुनिश्चित करता है, चाहे टिकट की कीमत कितनी भी अधिक हो। परिवर्तनीय दर के बजाय निश्चित शुल्क से बड़े लेनदेन पर यात्रियों को सीधा लाभ मिलता है। यह रेलवे सेवाओं को डिजिटल रूप से अधिक सुलभ और किफायती बनाने में मदद करता है।
एनपीसीआई के अनुसार, 2,000 रुपये तक के छोटे P2M लेन-देन पर 0% MDR (शून्य शुल्क) बना रहेगा, जो कुल P2M लेन-देन की मात्रा का 95 प्रतिशत से अधिक हिस्सा है।

जरूरी सेवाओं और छोटे विक्रेताओं पर वित्तीय बोझ को सीमित करने के लिए एनपीसीआई ने अलग रियायती श्रेणियां बनाई हैं:
आम जनता और रोजमर्रा के लेन-देन करने वाले उपभोक्ताओं के लिए एनपीसीआई ने पूरी तरह शून्य शुल्क की गारंटी दी है:
यूपीआई इकोसिस्टम को केवल सरकारी सब्सिडी पर निर्भर रखने के बजाय आत्मनिर्भर बनाने के लिए यह व्यवस्था तैयार की गई है। एमडीआर से प्राप्त होने वाली आय को मुख्य रूप से तीन प्रमुख क्षेत्रों में निवेश किया जाएगा:
पारंपरिक कार्ड भुगतानों की तुलना में यूपीआई एमडीआर को काफी कम और किफायती रखा गया है। जहां मानक क्रेडिट कार्ड पर एमडीआर 1.5% से 2.5% और डेबिट कार्ड पर 0.90% तक होता है, वहीं यूपीआई का 0.4% बेसलाइन एमडीआर (अधिकतम ₹300 की सीमा के साथ) इसे वाणिज्यिक उद्यमों के लिए सबसे सस्ता डिजिटल पेमेंट स्वीकृति उपकरण बनाता है। इससे व्यापारियों की पेमेंट प्रोसेसिंग लागत में सीधी कमी आती है।